Tuesday, 10 February 2026

अनीता -शक्ति

अनीता–शक्ति : प्रेम का छन्द

अनीता दीप, शक्ति बाती,
इन दोनों से उजियारा है।
साथ जले जीवन का दीपक
जैसे सचमुच का कोई तारा है॥

हँसते-रोते, चलते-चलते,
बरसों का ये मान हुआ।
हर कठिनाई आकर चली गई,
इनको और महान किया॥

आँगन में जब रुद्रा आया,
खिल उठी हर एक दिशा।
माँ की ममता, पिता का साहस,
बन गई उसकी परिभाषा॥

रुद्रा हँसा तो घर मुस्काया,
मौन भी उत्सव बन जाता।
इस छोटे से नन्हे स्वर में,
भविष्य गीत सुनाता॥

साल नहीं, संस्कार गिनते,
बंधन को वरदान कहें।
अनीता-शक्ति साथ रहें यूँ,
युग-युग तक पहचान रहें॥

वैवाहिक वर्षगाँठ की
हृदय से शुभकामनाएँ 
रुद्रा संग जीवन
सदा प्रेम से भरता जाए...

अनिल आर्य...

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