प्रिय बच्चों,
आज तुम्हारी फेयरवेल है,
और हमारी भी...
क्योंकि अब कॉपी जाँचने के बहाने
तुम्हारी लिखावट पर डांटने का मौका नहीं मिलेगा 😄
आजसे ना होमवर्क का डर,
ना सर की डाँट…
(और ना ही “कॉपी निकालो आज टेस्ट है ” की आवाज़ 😜)
फिर भी तुम्हे पढना है,
जिम्मेदारी लेनी है।
12वीं तक आते-आते
तुम सबने एक बात अच्छे से सीख ली है—
“सर, ये चैप्टर तो बहुत आसान है”
(और अगले दिन वही सबसे मुश्किल निकलता है)
किसी ने हिन्दी से दोस्ती निभाई,
किसी ने इंग्लिश से दूरी बनाए रखी,
और कुछ बच्चे ऐसे भी थे
जो पूरे साल यही सोचते रहे—
“ये बोर्ड में आएगा या नहीं?”
मोबाइल तुम सबका सबसे सच्चा मित्र रहा,
जो क्लास में भी साथ था,
और घर पर पढ़ाई के वक्त भी…
(हालाँकि पढ़ाई उससे कभी मिली नहीं 😜)
तुम सब छुप-छुप कर मोबाईल लाते रहे या जो भी कुछ करते रहे वो सब हमें पता होता था,
(तुम समझते हो छुपा लिया,
पर हमें सब पहले से पता है,
छात्र की चाल, आँख की भाषा-
ये किताब से पहले पढ़ा है।
सब सोचते हैं दाल में काला है,
हम हँस कर यही कहते हैं-
बेटा, यहाँ तो
पूरी दाल ही काली है! 😄
हमें सब पता है,
पहले से ही
तुम सोचते हो,
बात छुपा ली है...)
एग्ज़ाम में
पेपर देखकर माथा खुजाया,
फिर बगल वाले को देखा
और सोचा—
“इसको आता है तो मैं भी पक्का पास!” 😆
ऐसा मत करना, अपनी तैयारी रखना
ताकि रिजल्ट आने के बाद न हो
उदासी का अहसास।, 😒
रिज़ल्ट के बाद
एक डायलॉग सबका सेम—
“सर, बस दो नंबर से रह गए…”
हाँ भई, वही दो नंबर
हर साल सबके रह जाते हैं 😜
पर अबकी बार मत रहने देना...
लेकिन मज़ाक अपनी जगह,
तुम सबने स्कूल को
हँसी भी दी,
शोर भी दिया,
और ऐसी यादें साझा की,
जो सिलेबस में नहीं मिलतीं।
अब आगे की दुनिया
नक़ल व बहाने से नहीं,
ख़ुद के दम से ही चलेगी,
और आगे सब जगह तुम नहीं
तुम्हारा काम बोलेगा।
जाओ, बड़े बनो,
नाम कमाओ,
पर कभी ज़िंदगी
तुम्हारा पेपर मुश्किल कर दे-
तो याद रखना,
स्कूल में एक अनिल आर्य सर थे,
जो हर मुश्किल सवाल से पहले
आसानी से हँसा देते थे,
और मुश्किलें आसान हो जाती थी...
ऑल द बेस्ट, मेरे शेरों! 🐯
जाओ अब जंगल तुम्हारा है, राज करो...
अनिल आर्य...
No comments:
Post a Comment