बोलते ही घर में छूट जाए हँसी का फुहारा,
मामी हँस-हँस के फूल गईं,
खाट पे बैठी, खाट भी झूल गईं।
मामी के बीमारी भी भारी,
अर मामी सब पे भारी,
होरी इसी जणु मोटा महंत,
करे हाथी की सवारी।
मामा हँसते-हँसते रहते हिलते,
हँसते-हँसते सबते मिलते,
हिलने की अब आदत बणगी
अब तो चलते-चलते भी हिलते।
आर्यन कमेरा मामा जिसा, होग्या मोटे ते पतला
खाना भी कम कर दिया, पहले खाता था एक तसला।
अब लड़का जिम्मेदारी लेने को तैयार,
नौकरी लगते ही, काम बाँध दो,
बस जाए परिवार।
सेजल पसरी रहती दिन-भर, आराम की दूकान,
कुछ भी लेण चले जाओ, खत्म मिले समान।
सोफे से दोस्ती दिन में,
देर सुबह तक तकिए पे सपनों का शौर,
उठाने की कहो तो कहती
“अभी सोने दो 10 मिनट और।”
अब शादी करणी से इसकी भी,
माहरे नहीं से कोए आँट,
पहले बैठे ज्यांगे तयारी कर कै,
बैरा सै, सुसराड़िया फोड़ेंगे माहरी टाँट।
सभी यहाँ हँसते-मिलते, घंटों सब बातों में झूमते,
हमारा यह परिवार, हँसी का असली ठिकाना,
जहाँ हर मज़ाक में छुपा प्यार,
और हर हँसी में अपनापन अपार,
भगवान से दुआ, ऐसे ही हँसता रहे हमारा यह परिवार।
अनिल आर्य...
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