Sunday, 1 February 2026

हुक्का

खेतों का राजा हुक्का,
हुक्का पंचायत की शान,
ज्ञान की चर्चा हुक्के पे होती,
हुक्का हरियाणे की पहचान।

आज-काल का यूथ बोले-
सूण के गाणे जोड़ तोड़ के,
अक भाई:

मूछयाँ ने मरोड़ के,
सांस ने जोड़ के,
छाती ने फूला के,
पेट ने भींच के,
मार घूँट खींच के,
तू मार घूँट खींच के...

और यो so कॉल्ड यूथ ईसा से,
जवान यो हुया नहीं,
चेहरे पे बुढ़ापा दीखे से,
और घर के दो काम बतादें,
ये करती हाना जीक्खें से।

अर चार कदम तेज चाल लें,
सांस कसूती फूल ज्या से,
गलती ते जै दौड़ना पड़ज्या,
ये सांस भी भूलज्याँ सें।

फेर आँख खूलें हॉस्पिटल में,
जीवन की इनकी आस नहीं,
खूब पीवें हुक्का महफ़िल में,
अर इन ने दारू ते आती बांस नहीं।

अनिल आर्य..

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