रजनी…
तू मुस्कुराती है तो
शब्द शर्म से झुक जाते हैं,
हुस्न को भी डर लगता है
कि कहीं तुझसे हार न जाए।
तेरे चेहरे पर
सादगी का ऐसा नूर है
कि आईना भी रोज़
खुद को ठीक करने लगता है।
तेरी आँखें—
जैसे बिना बोले ही
मेरी सारी थकान पूछ लेती हों,
और पलक झपकते ही
मेरी दुनिया समेट लेती हों।
तेरा स्वभाव…
हाय, वही तो मेरी सबसे बड़ी दौलत है,
जहाँ प्यार शोर नहीं करता,
बस चुपचाप
मेरे हर ग़लत दिन को
सही बना देता है।
और जब तू नाचती है रजनी…
तो ज़मीन ताल नहीं देती,
वक़्त थम जाता है,
मैं भूल जाता हूँ
कि दुनिया देखनी भी थी—
क्योंकि उस पल
सिर्फ़ तू ही काफ़ी होती है।
तेरी हर अदा
बिना सिखाए क़ायदा बन जाती है,
तेरी हर हँसी
मेरे नाम की दस्तख़त लगाती है।
मैं अनिल…
तेरा होना ही
मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है,
और तेरा प्यार—
मेरी ज़िंदगी की
सबसे ख़ूबसूरत आदत।
अगर मोहब्बत का
कोई पता होता,
तो उस घर का नाम
“रजनी” ही होता…
और दरवाज़े पर लिखा होता—
यहाँ अनिल बसता है। 💞
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