साली साहिबा मोनिका,
हँसी की चलती फ़ैक्टरी,
जहाँ खड़ी हो जाएँ आप,
शुरू हो जाए कॉमेडी की कैटेगरी।
आपकी मुस्कान में शरारत,
बातों में मीठा तीर,
ऊपर से भोली सूरत,
अंदर से पूरी वीर।
काम में ऐसी तत्पर,
मानो बिजली की रफ़्तार,
रसोई हो या ज़िम्मेदारी,
सब पर मोनिका का अधिकार।
पर भाई साहब को छेड़ने में,
आपका अलग ही है विभाग,
कभी कहें – “गंभीर बहुत हैं”,
कभी करें परिहास।
और फेशनेबल भी हैं पूरी,
कभी जूडा, कभी पिन लगाती हैं बाल में,
और इनसे बचके रहना भाई साहब,
झाड़ा लगवाने भी जाएँ-तो चाकू रखती हैं शॉल में।
घर की रौनक आपसे,
हँसी का चलता व्यापार,
रजनी भी मुस्काए चुपके,
देखे अपने जीजा की हार।
पर सच यह भी है मोनिका जी,
दिल आपका है खरा सोना,
सभी अपनों के लिए जीती हैं,
नहीं यह किसी और से होना।
जन्मदिन पर शुभकामनाएँ,
सपनों को मिले उड़ान,
हँसी आपकी यूँ ही गूँजे,
और बढ़े आपका मान-सम्मान।
और हाँ, एक बात आख़िरी,
भाई साहब को ज़्यादा न सताइएगा,
वरना अगली बार कविता नहीं,
पूरी कहानी लिखवाईयेगा।
जन्मदिन मुबारक हो साली साहिबा!
सप्रेम : अनिल आर्य...
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